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लखनऊ के केजीएमयू में हर महीने आ रहे जेंडर डिस्फोरिया के 10-12 केस

 

लखनऊ के केजीएमयू में हर महीने आ रहे जेंडर डिस्फोरिया के 10-12 केस


 

आपने सोशल मीडिया या सोसाइटी में अपने बीच अकसर ऐसे लोगों को देखा होगा, जो लड़का होने के बाद भी लड़की की तरह इंटरैक्ट करते हैं, ड्रेसअप होते हैं और वैसे ही रहना चाहते हैं। वहीं दूसरी तरफ, कुछ गर्ल्स भी टॉमबॉय की तरह रहती हैं, ड्रेसअप से लेकर एटीट्यूड तक खुद को लड़के की तरह ही प्रेजेंट करती हैं।

लखनऊ (ब्यूरो)। आपने सोशल मीडिया या सोसाइटी में अपने बीच अकसर ऐसे लोगों को देखा होगा, जो लड़का होने के बाद भी लड़की की तरह इंटरैक्ट करते हैं, ड्रेसअप होते हैं और वैसे ही रहना चाहते हैं। वहीं दूसरी तरफ, कुछ गर्ल्स भी टॉमबॉय की तरह रहती हैं, ड्रेसअप से लेकर एटीट्यूड तक खुद को लड़के की तरह ही प्रेजेंट करती हैं। इस तरह से रहना उनके लिए तो नॉर्मल है क्योंकि वो खुद को उसी रूप में कंसीडर करते हैं, लेकिन सोसाइटी की तरफ से जो रिस्पॉन्स उन्हें मिलता है वो काफी चैलेंजिंग होता है। कुछ लोगों को ये फैशन लगता है और कुछ को बीमारी। हालांकि, एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और सायकियाट्रिस्ट का कहना है कि किसी जेंडर के अंदर दूसरे जेंडर की फीलिंग होना न तो फैशन है और न कोई बीमार
कोई बीमारी या फैशन नहीं है ये
जेंडर डिस्फोरिया एक ऐसी कंडीशन है जिसमें एक जेंडर के पर्सन के अंदर दूसरे जेंडर की फीलिंग्स होती हैं और वो खुद को उस दूसरे जेंडर का ही मानने लगता है, वैसे ही बात करता है, तैयार होता है और उसी जेंडर की तरह रहना चाहता है। केजीएमयू के सायकियाट्रिस्ट डॉ। आदर्श त्रिपाठी, जिनके पास अकसर जेंडर डिस्फोरिया के केस आते हैं, बताते हैं कि जेंडर डिस्फोरिया की भी कई कंडीशन हो सकती हैं, जिसमें पहला है कि पर्सन को दूसरे जेंडर की चीजें पसंद आती हैं, वो उनकी तरह से इंटरेक्ट करता है, रहना चाहता है और बिहेव करता है। ये चीजें बचपन से भी नजर आ सकती हैं और एक एज के बाद भी, इसमें भी दूसरी कंडीशन ये है कि पर्सन कंफ्यूज हो सकता है कि मैं हूं तो लड़का, लेकिन मुझे लड़कियों के कपड़े पसंद हैं या मैं लड़की होकर लड़कों की हेयरस्टाइल पसंद करती हूं और वो मानने लगते हैं कि उन्हें दूसरे जेंडर की तरह बनना है , लेकिन जरूरी नहीं है कि ये


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